Thursday, 19 December 2013

सुप्रीम कोर्ट ने गांधी को जाति बनाने की मांग नकारी

सुप्रीम कोर्ट ने गांधी को जाति बनाने की मांग नकारी

Thu, 19 Dec 2013 06:34 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने गांधी को जाति बनाने की मांग नकारी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपत्तियों से पैदा हुई संतानों को गांधी जाति के रूप में मान्यता देने की एक स्वतंत्रता सेनानी की जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, वह 86 वर्षीय याचिकाकर्ता सलेम वेलु गांधी उर्फ सी वेलू द्वारा उठाये गए मुद्दे पर विचार करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन याची इस संबंध में सरकार के पास उचित प्रतिवेदन भेजने को स्वतंत्र हैं।
प्रधान न्यायाधीश पी सतशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने कहा, हमने व्यक्तिगत रूप से पेश याचिकाकर्ता को सुना और संबंधित सामग्री का अवलोकन किया। हम याची द्वारा उठाए गए मुद्दे पर विचार के पक्ष में नहीं हैं।
वेलु ने अपनी याचिका में कहा था कि जातिविहीन समाज के सृजन के लिए सिर्फ एक 'गांधी' जाति होनी चाहिए ताकि अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपत्तियों से पैदा हुई संतानों को पुरानी जाति प्रथा के कारण परेशान नहीं हो। इस तरह के कदम से जातिविहीन समाज की स्थापना में मदद मिलेगी। अत: शीर्ष अदालत केंद्र और राज्य सरकारों को गांधी जाति को मान्यता देने के लिए निर्देश दे।
याचिका में दलील दी गई थी कि जन्म के समय बच्चे के साथ कोई जाति सूचक चिन्ह नहीं होता है लेकिन यह तो समाज है जो उन्हें तमगे देता है। समूची हिंदू आबादी 9500 से अधिक जातियों में बंटी है। मुस्लिमों में भी विभिन्न उप जातियां हैं और जातियों के आधार पर पक्षपात ही देश में गुलामी का कारण रहा है।

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